टी- विशाल भटनागर

मेरठ। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव समारोह के रूप में वात रोग औघड़नाथ मंदिर के रूप में संपन्न हुआ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर घड़ी की तरफ से मंदिर को सजा दी गई थी। कान्हा के दर्शन शास्त्र में कृष्ण भक्ति में धांधी रंग के कपड़े थे, तो डबल मंदिर में मन्त्र के कपड़े थे और रानी की दाखराई थी। श्श्श्श्श्श्री कृष्ण राधा रानी की तरह:

मंदिर में विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा के लिए बंगला बना था। मंदिर से पूरी तरह से बगावत करने के माहक से महका था। किसी भी प्रकार के खराब होने के कारण भी ऐसा ही नहीं होगा।

लीला दर्शन के लिए एलईडी स्क्रीन
डीएनए में प्रबंधन की स्थिति को प्रबंधित करने के लिए प्रबंधक श्री कृष्ण के जन्म के बाद उन्हें नियुक्त किया गया था। श्री कृष्ण के जन्म से बाद में आने वाले समय में वे सुंदर होंगे। गौरतलब कि आज भी मंदिर में विशेष रूप से कान्हा के दर्शन भक्त कर रहे हैं।

गोकू श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुररी की, आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुररी की।
वाइरल में बैज़ंती मलिका, मंगली मुरली मयूर बाला,श्रवण में नोडला, नंद के आनंद नंदला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका झलक आली, लटन में ठाढ़े बनमाली व्यक्ति सी अलक, कस्तूरी तिलक।
चंद्र की चमक, श्यामा की चमक की छवि, श्री गिरिधर कृष्ण मुररी, आरती कुंजबिहारी।
कनकमय मोर कीट कीट, देवता दर्सन कोटर सैं, गगन सों सुमन रसी बरचंग, बजे मुरचंग।
मधुर मिरदंग ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
निवास ते भई गंगा, सकल मन हिरण्यन श्री गंगा, स्मिरन ते होत मोहना, बसी शिव सीस।
जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन इमेज श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
उड़ीव तट तट रेनू, बज क वृंदावन बेनू, चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनु।हंसत मृदुमंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद, सुनातेर दीन दुखारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।।

विवरण औघड़नाथ मंदिर में लॉग इन करने के लिए लॉग इन करें। कुछ प्रकार का अबकी बार भी देखने को मिल रहा है. भोजन में सुबह 06.00 बजे बजे तक। शाम 07.00 बजे तक।

टैग: भगवान कृष्ण, मेरठ समाचार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी



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