परोसने

स्थापना की स्थापना वर्ष 1646 में किया गया था।
जमाना महादजी सिंधिया साल 1760 में आखिरी का मरा था।

यह: हरिकांत शर्मा
आगरा देवों में प्रथम पूज्य गणपति बप्पा गुरुवार को घर-घर में विराजमान हो गए। 3 साल के बाद गणेशी में। इस बार बिग धूमधाम से नगर में गणेशी मेनेई जा रहा है। आज हम आगरा के गोकुलपुरा में 261 साल के रिकॉर्ड किए गए हैं। गणपति की शूटिंग के दौरान महादजी सिंधिया बी.जी.

स्थापना की स्थापना वर्ष 1646 में किया गया था। जमाना महादजी सिंधिया साल 1760 में आखिरी का मरा था। उस समय मंदिर में पीपल का पानी भी मंदिर में उपलब्ध था। इस समय वे रहने वाले थे। मंदिर का वास्तुदोष और उस पर रखा हुआ है। ️ मुगल️️️️️️️️️️️

चंदन की पालक पर विराजमान है सिद्ध विनायक
कालप्रांत में सिद्धि विनायक के नाम चर्चित हो गए। दैवीय नगर और मराठा शहर के प्रबंधन के लिए इस तरह के शहर के प्रबंधन में शहर की यात्रा के लिए डॉ. ध्‍वनि में ध्‍यान लगाने के बाद महादजी सिंधिया के दृश्‍य में ध्‍वनि में ध्‍वनि में ध्‍वनि में गणेश की सुंदरता के लिए गणेशी थे। आज भी मंदिर में गणेश गणेश की 100 प्रतिमा स्थापित है, जो चंदन के सिंहासन पर विराजमान है। चंदन से पालना पालकी पर गणेश को नगर घुमने फिरने में भी शामिल हैं।

गणेश चतुर्थी पर्व 56 प्रकार का भोग
डेटाबेस के पैसर ज्ञानेश शास्त्री ️ कि️️️️️️️️️️️️️️️️️ आने वाले सभी मनोभावों का पूरा होना. गणेश चतुर्थी के लिए 56 प्रकार के भोग भोजन में शामिल होते हैं। सूक्तिविनायक को बेसन के मोदक पसंद पसंद हैं। इस से बासन के मोदक और सीढ़ियों से बाहर।

मंदिर का समय
5:00 बजे बजे तक, दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है।

श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिरhttps://maps.app.goo.gl/AWuU8xGmCYfU4Wd96

टैग: आगरा समाचार, गणेश चतुर्थी



Source link

By RSS

Leave a Reply

Your email address will not be published.